मैं कब कहता हूँ वो अच्छा बहुत है
मगर उसने मुझे चाहा बहुत है
खुदा इस शहर को महफूज़ रखे
ये बचों की तरह हँसता बहुत है
मैं तुझसे रोज़ मिलता चाहता हूँ
मगर इस राह में ख़तरा बहुत है
मेरा दिल बारिशों में फूल जैसा
ये बच्चा रात में रोता बहुत है
इसे आंसू का एक कतरा न समझो
कुयाँ है और ये गहरा बहुत है
उसे शोहरत ने तनहा कर दिया है
समंदर है मगर प्यासा बहुत है..
मैं एक लम्हें में सदियाँ देखती हूँ
तुम्हारे साथ एक लम्हा बहुत है
मेरा हँसना ज़रुरी हो गया है
यहाँ हर शख्स अकेला बहुत है
---बशीर बद्र
मगर उसने मुझे चाहा बहुत है
खुदा इस शहर को महफूज़ रखे
ये बचों की तरह हँसता बहुत है
मैं तुझसे रोज़ मिलता चाहता हूँ
मगर इस राह में ख़तरा बहुत है
मेरा दिल बारिशों में फूल जैसा
ये बच्चा रात में रोता बहुत है
इसे आंसू का एक कतरा न समझो
कुयाँ है और ये गहरा बहुत है
उसे शोहरत ने तनहा कर दिया है
समंदर है मगर प्यासा बहुत है..
मैं एक लम्हें में सदियाँ देखती हूँ
तुम्हारे साथ एक लम्हा बहुत है
मेरा हँसना ज़रुरी हो गया है
यहाँ हर शख्स अकेला बहुत है
---बशीर बद्र
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