खिड़की चाँद किताब और मैं
मुद्दत से इक बाब और मैं
शब् भर खेलें आपस में
दो ऑंखें इक ख़ाब और मैं
मौज और कश्ती साहिल पर
दरिया में गर्दाब और मैं
शाम , उदासी, ख़ामोशी
कुछ कंकर तालाब और मैं ..
हर शब् पकड़े जाते हैं
गहरी नींद, तेरे ख़ाब और मैं ...फ़ैसल
(*बाब- सागर , शब्- रात , गर्दाब-लहरें )
मुद्दत से इक बाब और मैं
शब् भर खेलें आपस में
दो ऑंखें इक ख़ाब और मैं
मौज और कश्ती साहिल पर
दरिया में गर्दाब और मैं
शाम , उदासी, ख़ामोशी
कुछ कंकर तालाब और मैं ..
हर शब् पकड़े जाते हैं
गहरी नींद, तेरे ख़ाब और मैं ...फ़ैसल
(*बाब- सागर , शब्- रात , गर्दाब-लहरें )
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