Saturday, October 5, 2013

तुझसे बिछड़ कर क्या हूँ मैं , अब बाहर आकर देख 
हिम्मत है तो मेरी हालत आँख मिलाकर देख… 
शाम है गहरी,तेज़ हवा है,सर पे खड़ी है रात 
रास्ता गए मुसाफ़िर का अब दीया जला कर देख… Munir Niazi

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