Friday, April 6, 2012

कौन आयेगा यहाँ कोई न आया होगा- Kaif Bhopali

कौन आयेगा यहाँ कोई न आया होगा
मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा

दिल-ए-नादाँ न धड़क,ए दिल-ए-नादाँ न धड़क
कोई ख़त लेके पड़ोसी के घर आया होगा..

इस गुलसितां की रीत है शोख़-ए-दिल
तूने जिस फूल को पाला पराया होगा

दिल की किस्मत में ही लिखा था अँधेरा शायद
वरना मस्जिद का दीया किसने बुझाया होगा

गुल से लिपटी तितली को गिराकर देखो
आंधियो!! तुमने दरख्तों को गिराया होगा

खेलने के लिए बच्चे निकल आए होंगे
चाँद अब उसकी गली में उतर आया होगा

"कैफ़" परदेस में न याद करो अपने मकान
अब की बारिश ने उसे तोड़ गिराया होगा ..Kaif Bhopali

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