फरार हूँ मैं कुछ दिनों से
जो घुप्प अँधेरे की तीर जैसी सुरंग इक कान से
शुरू हो के दुसरे कान तक गई है,
मैं उस नली में छुपा हुआ हूँ ,
तुम आके तिनके से मुझको बाहर निकाल लेना... गुलज़ार
जो घुप्प अँधेरे की तीर जैसी सुरंग इक कान से
शुरू हो के दुसरे कान तक गई है,
मैं उस नली में छुपा हुआ हूँ ,
तुम आके तिनके से मुझको बाहर निकाल लेना... गुलज़ार
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