हर रिश्ता मुझसे
अपनी तबाही का हिसाब मांगता है
तो मैं अपनी कमजोरियों
और नाकामियों को
मजबूरियों का लिबास
पहना देता हूँ
ये जानते हुए भी
कि हर रिश्ता रूह
से जुडा होता है
और
रूहें कभी
लिबास नहीं पहनतीं ... Balvinder Singh
अपनी तबाही का हिसाब मांगता है
तो मैं अपनी कमजोरियों
और नाकामियों को
मजबूरियों का लिबास
पहना देता हूँ
ये जानते हुए भी
कि हर रिश्ता रूह
से जुडा होता है
और
रूहें कभी
लिबास नहीं पहनतीं ... Balvinder Singh
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