मैं तेरा मुन्ताज़िर हूँ मुझे मुस्कुरा के मिल
कब तक तुझे तलाश करूं अब आके मिल..
यूं मिल कि फिर जुदाई का लम्हा न आ सके
जो दरम्यान में है सब मिटा के मिल ...
ये क्या कि हम मिलें भी, मुलाक़ात भी न हो वसी
सीने से मत लगा मुझे दिल से लगा के मिल... Wasi Shah
कब तक तुझे तलाश करूं अब आके मिल..
यूं मिल कि फिर जुदाई का लम्हा न आ सके
जो दरम्यान में है सब मिटा के मिल ...
ये क्या कि हम मिलें भी, मुलाक़ात भी न हो वसी
सीने से मत लगा मुझे दिल से लगा के मिल... Wasi Shah
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