तुम्हारा प्यार तो साँसों में साँस लेता है
जो होता नशा, तो इक दिन उतर नहीं जाता
' वसीम' उसकी तड़प है, तो उसके पास चलो
कभी कुआँ किसी प्यासे के घर नहीं जाता
वो झूठ बोल रहा था बड़े सलीके से
मैं ऐतबार न करता तो और क्या करता..
' वसीम' उसकी तड़प है, तो उसके पास चलो
कभी कुआँ किसी प्यासे के घर नहीं जाता
वो झूठ बोल रहा था बड़े सलीके से
मैं ऐतबार न करता तो और क्या करता..
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