Monday, September 2, 2019

थोडा लिक्खा और ज्यादा छोड़ दिया
आने वालों के लिए रस्ता छोड़ दिया

लड़कियां इश्क़ में कितनी पागल होती हैं
फोन बजा और चूल्हा जलता छोड़ दिया

बस कानों पर हाथ रक्खे थे थोड़ी देर
और फिर उस आवाज़ ने पीछा छोड़ दिया

रोज़ इक पत्ता मुझ मे कर गिरता है
जब से मैंने बाग़ में जाना छोड़ दिया

तुम क्या जानो उस दरिया पर क्या गुज़री
तुम ने तो बस पानी भरना छोड़ दिया


- तहज़ीब हाफी

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