Monday, May 11, 2015

ਹਾਦਸੇ ਤੇ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀ

ਮੈਨੂੰ ਕੇਵਲ
ਹਾਦਸੇ ਦੇਖਣ ਦੀ
ਆਦਤ ਪੈ ਗਈ ਹੈ
ਮੇਰੀ ਬਾਰੀ ਦੇ ਬਾਹਰ
ਖੜ੍ਹਾ ਰੁੱਖ ਮੈਨੂੰ
ਓਦੋਂ ਤੀਕ ਨਹੀਂ ਦਿਸਦਾ
ਜਦੋਂ ਤੱਕ
ਉਸ ਉੱਤੇ ਬਿਜ਼ਲੀ ਨਹੀਂ ਡਿਗਦੀ .. 

Navtej Bharati
ਏਸ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ
ਕਿ ਮੈਂ ਬਚਦੀ ਖੁਚਦੀ ਇਕ ਅੱਧ ਯਾਰੀ ਉਤੇ ਵੀ
ਫੌੜੀਆਂ ਹੋਣ ਦਾ ਇਲਜ਼ਾਮ ਧਰ ਕੇ
ਉਲ੍ਹਾਮੇ ਵਰਗੀ ਫਕੀਰੀ 'ਚ ਬਦਲ ਜਾਵਾਂ
ਜਾਂ ਗੁੰਮਨਾਮ ਪਰਦੇਸੀ ਹੋ ਜਾਵਾਂ
ਤੂੰ ਪਰਤ ਆ
 - ਪ੍ਰਮਿੰਦਰ ਸੋਢੀ
दिल में कुछ और, जुबां पे कुछ और बात करता हैं ,
खंजर हाथ में लिए हुए मोहब्बत की बात करता हैं !
सुना है मैने प्यार, दोस्ती - वफ़ा सब अमीरो की ज़ागीर है,
मै खाली जेबें टटोलता हुँ, वो बिछड़ने की बात करता है !!
लाज़िमी हैं उसका मुझसे यूँ खफ़ा होना भी ,
मैं शिद्द्त से उसे चाहता हूँ वो बनावट की बात करता हैं !
उन्हें शिक़ायत है मेरे गुफ्तगू के तरीको से,
मुझे ख़ामोशी हैं पसंद, वो अल्फ़ाजों से बात करता हैं !!
हुनरमन्द हैं वो जो हैं खुद को बदलने की फिक्र में " रेहान ",
नादान हैं वो जो ज़माने को बदलने की बात करता हैं ....!!!!
-चंद्रेश सिंदल "रेहान"
ਲੈ ! ਮੈਂ ਬੰਦ ਕਰਦਾ ਹਾਂ
ਇਹ ਕਥਾ
ਸੌਗੰਧ ਖਾਂਦਾ ਹਾਂ ਧੜਕਦੇ ਪੱਥਰ ਤੇ ਹੱਥ ਰੱਖਕੇ
ਕਿ ਮੈਂ ਤੇਰੇ ਸਾਹਾਂ ’ਚ ਜਿਹੜੀ ਖਲਬਲੀ ਛੱਡੀ ਸੀ
ਉਸਨੂੰ ਆਪਣੇ ਸਾਹਾਂ ’ਚ ਵਾਪਸ ਲੈਂਦਾ ਹਾਂ।  

-ਜਸਵੰਤ ਦੀਦ
याद है इक दिन
मेरी मेज़ पे बैठे-बैठे
सिगरेट की डिबिया पर तुमने
एक स्केच बनाया था
आकर देखो
उस पौधे पर फूल आया है !
-Gulzar

Munnawar Rana about Maa

गले मिलने को आपस में दुआयें रोज़ आती हैं
अभी मस्जिद के दरवाज़े पे माएँ रोज़ आती हैं
कभी —कभी मुझे यूँ भी अज़ाँ बुलाती है
शरीर बच्चे को जिस तरह माँ बुलाती है
किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई
मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई
ऐ अँधेरे! देख ले मुँह तेरा काला हो गया
माँ ने आँखें खोल दीं घर में उजाला हो गया
इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है
मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊँ
माँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ
मेरा खुलूस तो पूरब के गाँव जैसा है
सुलूक दुनिया का सौतेली माओं जैसा है
रौशनी देती हुई सब लालटेनें बुझ गईं
ख़त नहीं आया जो बेटों का तो माएँ बुझ गईं
वो मैला—सा बोसीदा—सा आँचल नहीं देखा
बरसों हुए हमने कोई पीपल नहीं देखा
कई बातें मुहब्बत सबको बुनियादी बताती है
जो परदादी बताती थी वही दादी बताती है