Wednesday, March 4, 2015

सूरज पर प्रतिबंध अनेकों 
और भरोसा रातों पर
नयन हमारे सीख रहे हैं 
हँसना झूठी बातों पर

हमने जीवन की चौसर पर 
दाँव लगाए आँसू वाले
कुछ लोगों ने हर पल, हर दिन 
मौके देखे बदले पाले
हम शंकित सच पा अपने, 
वे मुग्ध स्वयं की घातों पर
नयन हमारे सीख रहे हैं 
हँसना झूठी बातों पर

हम तक आकर लौट गई हैं 
मौसम की बेशर्म कृपाएँ
हमने सेहरे के संग बाँधी 
अपनी सब मासूम खताएँ
हमने कभी न रखा स्वयं को 
अवसर के अनुपातों पर
नयन हमारे सीख रहे हैं 
हँसना झूठी बातों पर

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